बोझ नहीं, एक बेटी हूँ मैं
बोझ नही, एक बेटी हूँ मैं
सदियों से संसार की उत्त्पत्ती हूँ मैं
ख्वामखा ही खुद में शर्मिंदा हूँ मैं
अभिशाप नही वीरों की जननी हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
माँ की ममता हूँ,
बहु की सम्पन्नता हूँ मैं
अभिशाप नही वीरों की जननी हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
सीता की निर्मलता हूँ,
राधा की चंचलता हूँ मैं
काली का रौद्र रूप हूँ
दुर्गा की शक्ति हूँ मैं
अभिशाप नही वीरों की जननी हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
करुणा की देवी हूँ
ममता की मूरत हूँ मैं
प्रेम का सागर हूँ
त्याग की भावना हूँ मैं
अभिशाप नही वीरों की जननी हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
परिवार की रौनक हूँ
पिता का गर्व हूँ मैं
माँ के संस्कारों से तराशी हुई तस्वीर हूँ मैं
हर भाई के सुख- दुःख से भरी एक खुली किताब हूँ मैं
माँ- पिता के बुढ़ापे का सहारा हूँ मैं
अभिशाप नहीं वीरों की जननी हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
कमज़ोर नहीं नारी-शक्ति हूँ मैं
माँ, पिता, भाई मेरे
एक बार गर्व से, उम्मीद से देखो तोह मुझे
खुदको ही पाओगे मुझमें
क्योंकि, गैर नही,
आपका ही दिल हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
बोझ नही एक बेटी हूँ मैं
Beautiful 😍
ReplyDeleteबहुत सुंदर प्रयास।
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