Monday, 9 December 2024

बातें

 चलो कुछ बातें करते हैं

बातें ही तो हैं बातों का क्या 

अलग बात है कि हर बात की अलग बात है 

ज़रा डपट घोल दें तो क्रोध हो जाए 

ज़रा इतराना छिड़क दें तो तंज हो जाए 

ज़रा इठला दें तो नाज़ हो जाए 

ज़रा दहशतगर्दी हो तो डर हो जाए 

ये क्रोध, तंज, नाज़, डर, फिक्र 

जो मिल बैठें ये साथ सभी तो इश्क़ हो जाए 


अच्छा छोड़ो सब 

चलो कुछ बात ही करते हैं

बातों का क्या ही है 

अच्छा सुनो 

बात करने से पहले बातों का एक करार करोगे क्या 

मैं क्रोध कहूं तो डर समझ लेना 

बात कोई मेरी डर कहे जो 

तो तुम मेरी फिक्र समझ लेना 

मैं जो कहूं फिक्र अपनी 

तो तुम मेरा प्रेम समझ लेना 


अच्छा अब बहुत हो गई बातें 

अब कुछ बातें तुमसे करते है 

और बताओ कैसे हो तुम?


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